10 दिसंबर 2025 को सीबीआय के विशेष दल और वेकोलि विजलेंस ने वेकोलि की निलजई खदान में छापामार कारवाई की है। इस कारवाई से दिशाभूल कर रेकार्ड आधारीत मामलों को दबाने की साजीश रखी गयी है। वही खदान रेकार्डो की जांच होने के साथ 2 राज्यों के पॉवर जनरेशन कंपनी के डीओं अंतर्गत कोल ग्रेड में अलग ग्रेड का कोयला देने जैसे विशेष आकलन लगाए गए है। जिस में अब तक जांचएजंसीयों ने कोई भी अधिकारीक रूप में बयान नही दिया है। वही निजि वॉशरी में जांच अधिकारीयों ने भेट देकर रेकार्ड की जांच करने और इस पर भी कोई खुलासा नही किया है। तो दुसरी और विभीन्न आकलन के गणित से वॉशरी और पॉवर जनरेशन कंपनीयों के ठेकों में महाघोटाले में हजारों करोड का घोटाला होने के आरोप लग रहे है। इन्ही आरोपो में निजि वॉशरी कंपनी के अधिकारीयों से स्पष्टीकरण मांगने पर नाम ना प्रकाशीत करने की शर्त पर दबी आवाज में अपना पक्ष रखा है। जिस में वॉशरी कंपनी व्दारा जांच में सहयोग करने और कोई भी घोटाला नही हुआ है। ऐसा होने की स्थिती में आम रूप से गिरफ्तारी के प्रचलीत नियम नुसार दर्जनों कारवाई के सत्य तो सामने आ सकते थे। लेकीन ऐसा ना होकर आरोप केवलबदनाम करने और माल कमाने का नियोजीत खेल साबीत होकर कुछ भी पुक्ता सबूत नही है। ऐसे में छापामार कारवाई और आरोपो के दौर में वास्तविक सत्य का खुलासा तो केवल जांचएजंसीयों के अधिकृत बयान और खुलासे से ही हो सकता है।









