चंद्रपुर जिले में मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं में मासुम नागरिकों की मौत हो रही है। जिस में शनिवार 27 दिसंबर को एक ही दिन में 2 की मौत के मामले सामने आए है। ताडोबा अंधारी व्याघ्र प्रकल्प के ताडोबा बफर क्षेत्र में बांबू कटाई का काम शुरू है। जिस में मामला बीट के कक्ष क्रमांक 381 में बांबू कटाई का काम वन कामगारों व्दारा किया जा रहा था। इसी दरम्यान झाडीयों में छुपे बाघ ने हमला किया है। इस हमले में बुधसिंग शामलाल मडावी रा. मुंडला बाळाघाट की मौत हुई है। घटना की जानाकारी मिलते ही वन विभाग दल ने घटना स्थल को भेट देकर पंचनामा कर शव जांच के लिए जिला सरकारी अस्पताल भेजा है। वही महादवाडी बीट के कक्ष क्रमांक 357 में भी बांबू कटाई का काम शुरू रहते समय झाडीयों में छुपे बाघ ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में प्रेमीसिंग दुखीउदे रा. बालाघाट की मौत हुई है। इस घटना की जानकारी मिलने पर वन विभाग दल ने पंचनामा कर शव जांच के लिए जिला सरकारी अस्पताल भेजा है। अन्य राज्य से वन क्षेत्र में काम करने आए कामगारों पर बाघ के हमले से क्षेत्र में भय का वातावरण है।
चंद्रपुर जिले में मानव वन्य जीव संघर्ष में अब तक कुल 47 नागरिकों की मौत हुई है। जिस में 42 मौत बाघ के हमले में होकर 3 तेंदुए के हमले और एक एक हाथी और भालु के हमले में मौत हुई है। विशेष रूप से नागपुर अधिवेशन में मानव वन्य जीव संघर्ष का मामला उठने के साथ वन मंत्रालय व्दारा मंथन करने और जल्द ही उपाय योजना का दांवा किया गया था। लेकीन वन विभाग के कार्य में ही बाघ का हमला और 2 की मौत ने वन विभाग की उपाययोजना की खोकली दांवेदारी की पोल ही खोली है।









